हैलो दोस्तों, आज हम लोग अपक्षय और अपरदन के बारे में अध्ययन करेंगे। Hello friends, today we will study about Weathering and Erosion . अपक्षय :- अपक्षय वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पृथ्वी की सतह पर मौजूद चट्टानों में टूट-फूट होती है। यह अपरदन से अलग है, क्योंकि इसमें टूटने से निर्मित भूपदार्थों का एक जगह से दूसरी जगह स्थानान्तरण या परिवहन नहीं होता। यह अवघटना अपने ही स्थान पर होती है, इसके बाद निर्मित पदार्थों का कुछ हिस्सा अवश्य अपरदन के कारकों द्वारा परिवहन हेतु उपलब्ध हो जाता है। आमतौर पर इसे एक जटिल प्रक्रिया माना जाता है जिसमें वातावरण का तापमान, नमी, चट्टान की संरचना, दाब और विविध रासायनिक और जैविक कारक एक साथ मिलकर कार्य करते हैं। Weathering: - Weathering is the process by which rocks on the surface of the Earth break up. This is different from erosion, because there is no transfer or transport of earthworks created by breakage. This phenomenon occurs in its own place, after which some part o...
हैलो दोस्तों आज हम लोग संघनन(Condensation) के बारे में अध्ययन करेंगे। Hello friends, today we will study about condensation. संघनन(Condensation) :- Image source- Google Image by- Thinglink.com जल के गैसीय अवस्था से तरल या ठोस अवस्था में होने वाले परिवर्तन को संघनन कहते हैं। संघनन को प्रभावित करने वाले दो प्रमुख कारक हैं। वायु की सापेक्षिक आर्द्रता तापमान में कमी जब वायुमंडल के तापमान में कमी आती हैं तो धूल कणों का संघनन शुरू हो जाता हैं। इन कणों को संघनन केंद्र कहते हैं। धूल, धुआँ और समुद्री नमक के कण अच्छे संघनन के केंद्र माने जाते हैं। संघनन की क्रिया से ओस, कुहरा, कुहासा तथा बादल बनते हैं, जोकि संघनन के ही विविध रूप हैं। वायु के जिस तापमान पर जल अपनी गैसीय अवस्था (जलवाष्प) से तरल या ठोस अवस्था में बदलता है तो उसे ओसांक कहते हैं। जब ओसांक हिमांक के नीचे होता हैं तो तुषार, हिम, पक्षाभ मेघ आदि का निर्माण होता हैं। जब ओसांक हिमांक से ऊपर ...